मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA गठबंधन का 'जन महाभियोग' प्रस्ताव पारित, इस्तीफे की मांग तेज
नई दिल्ली। देश की चुनावी व्यवस्था और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच विपक्षी INDIA गठबंधन ने शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 'जन महाभियोग' का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर दिया। दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर आयोजित इस कार्यक्रम में विपक्षी दलों के कई वरिष्ठ नेताओं और सांसदों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार ने की। इस प्रतीकात्मक कार्यवाही के दौरान विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर चुनावी प्रक्रिया में पक्षपात, मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित करने जैसे गंभीर आरोप लगाए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रस्ताव पेश किया, जबकि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने समापन भाषण दिया। इसके बाद प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया।
SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची पर उठाए सवाल
INDIA गठबंधन का आरोप है कि देश के विभिन्न राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। विपक्षी नेताओं का दावा है कि इस प्रक्रिया से लगभग 13.2 करोड़ मतदाता प्रभावित हुए हैं। विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी है, लेकिन SIR प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया है। कार्यवाही के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त पर छह प्रमुख आरोप लगाए गए। इनमें कथित वोट चोरी की साजिश, मतदाता सूची से नाम हटाना, संसद की निगरानी के बिना फॉर्म-6 में बदलाव, ECINET के माध्यम से मतदाता सूची पर नियंत्रण, दो चुनाव आयुक्तों को अपनी बात रखने का अवसर नहीं देना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशों पर काम करने के आरोप शामिल हैं।
खड़गे ने लगाए गंभीर आरोप
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त स्वतंत्र रूप से काम करने के बजाय केंद्र सरकार के प्रभाव में चुनाव आयोग का संचालन कर रहे हैं। उन्होंने ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की। विपक्षी नेताओं का कहना है कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की निष्पक्षता पर सवाल उठना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर विषय है।
क्या है 'जन महाभियोग'?
यहां यह समझना जरूरी है कि INDIA गठबंधन की ओर से पारित 'जन महाभियोग' का प्रस्ताव संसद में पारित संवैधानिक महाभियोग प्रस्ताव नहीं है। यह विपक्ष की ओर से आयोजित प्रतीकात्मक जन-सुनवाई और राजनीतिक विरोध की कार्यवाही है। मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया अलग है, जिसके लिए निर्धारित कानूनी प्रावधानों का पालन करना होता है।
रविवार को रामलीला मैदान में प्रदर्शन
विपक्ष ने इस मुद्दे पर अपना आंदोलन आगे बढ़ाने का भी ऐलान किया है। एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की ओर से बड़ी रैली आयोजित की जा रही है। इसमें SIR प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों, मतदाता सूची की पारदर्शिता और चुनावी व्यवस्था से जुड़े सवालों को उठाया जाएगा।
इस पूरे घटनाक्रम ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता, मतदाता सूची की विश्वसनीयता और संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस को तेज कर दिया है। हालांकि विपक्ष के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और चुनाव आयोग का पक्ष इस विवाद को पूरी तरह समझने के लिए महत्वपूर्ण होगा।